चराग दिल का हमेशा जलाए रखते हैं
हवा से दोस्ती थोड़ी बनाए रखते हैं।
पसंद रार नहीं रब को बात सच है यही
ज़ुबान इस लिए अपनी बचाए रखते हैं।
ज़िगर को चाक किए जाते हैं सभी लेकिन
बड़ों के सामने नज़रें झुकाए रखते हैं।
बड़े दुखों से सजाई बड़ों ने जो पगड़ी
उसे सलीक़े से हम भी सजाए रखते हैं।
पलक बिछा के हैं जिनके लिए अनिल हम वो
हमारे वास्ते खंजर बिछाए रखते हैं।
-पंडित अनिल
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