हमारी व्यवस्था का
विकट खेल है।
थाने के बाद कोर्ट
और कोर्ट के बाद
जेल है।।
-अविनाश ब्यौहार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X