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एक दाने की कीमत

                
                                                         
                            "एक दाने की कीमत"
                                                                 
                            

थाली में छोड़ देते हो जो तुम निवाला,
सोचा है कभी, किसकी भूख है वो हवाला?

तुम्हारी थाली में जो बच जाता है अनाज,
किसी गरीब के घर का वो है सारा ताज।

करोड़ों सोते हैं यहाँ भूखे पेट रात भर,
और तुम फेंक देते हो खाना, बिना सोचे जरा भर।

अन्न देवता है, इसका अपमान मत करो,
भूखे की आह मत लो, इसका सम्मान करो।

जितनी भूख हो, उतना ही लो थाल में,
बचे तो बाँट दो, किसी भूखे के नाम में।

एक दाना भी बचेगा नहीं जब थाली में,
कोई बच्चा रोयेगा नहीं फिर भूख की खाली में।

आओ कसम खाएं, अन्न व्यर्थ न गंवाएंगे,
हर दाने को बचाकर, हम देश को बचाएंगे।
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4 घंटे पहले

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