मन वचन कर्म से राम सहारा।
तजि के सारे जग का पसारा॥
मोह मान माया सब त्यागो।
राम नाम का दीपक जगाओ॥
छल कपट की राह न जाऊं।
संत वचन नित शीश चढ़ाऊं॥
क्रोध लोभ का संग न भाए।
राम भजन में चित्त रमाए॥
कड़वी बोली मन से त्यागूं।
सबके हित की बात ही मांगूं॥
संत चरण की धूल लगाऊं।
भव सागर से पार मैं जाऊं॥
दूजे के हित मन में लाऊं।
राम कृपा का अमृत पाऊं॥
एक आस है राघव तेरी।
नैनों में छवि श्याम घनेरी॥
बस इक विनती राम से मेरी।
चरण शरण दो श्याम घनेरी॥
-देवकी नन्दन गहतोड़ी
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