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पेपर लीक

                
                                                         
                            पेपर लीक का खेल ये सारा।
                                                                 
                            
किसने रचाया बोलो तो।।
क्या ये पहली बार हुआ है?
कोई अब मुँह खोलो तो।।
सब प्रतिभागी मेहनत करते,
घर से अधिकतर दूर हैं रहते।
इस सपने को ना केवल वे,
संग में अभिभावक भी जीते।।
क्यों है व्यवस्था ऐसी जाने,
कुछ भी समझ नहीं आता है।
वर्षों वर्ष का किया परिश्रम,
एक ही पल में ढह जाता है।।
सभी बात करते हैं उनकी,
जिन्होंने पेपर लीक किया।
पर कैसे पता चलेगा ये,
किस किस ने इसमें भाग लिया?
जितना मेरी समझ में आया,
उससे मैं संतुष्ट नहीं।
कहाँ छिपे बैठे हैं वो सब,
जिन सा कोई दुष्ट नहीं।।
सारे करते बात हैं उनकी,
जो जो इसमें शामिल हैं।
लाखों करोड़ों परिवारों के,
सपनों के जो क़ातिल हैं।।
पर एक बात जो समझ ना आई,
कोई मुझको समझाए।
इनमें उन परिवारों के भी,
नाम भला क्यों ना आएँ?
जो चाहे अपने बच्चों को,
पेपर पहले ही मिल जाए।
सबको पीछे छोड़ के उनका,
लाल ही डॉक्टर बन जाए।।
बेचेगा तो तभी ना कोई,
जब कोई खरीददार होगा?
बेचने वालों के संग खरीददार भी,
बराबर के ज़िम्मेदार होगा।
ढूँढो उनको जिन्होंने बेचा,
युवा शक्ति के सपनों को।
पर छोड़े वे भी ना जाएँ,
ठगा जिन्होंने अपनों को।।
नहीं गलत है बच्चों से,
आशा रखना अच्छे की।
लेकिन कभी बैठ कर पूछो,
इच्छा भी अपने बच्चे की।।
पूछो, देखो, जाँचो क्षमता,
उसकी जिसको जन्म दिया।
जिसकी इच्छाओं का तुमने,
अपने ही हाथों दमन किया।।
हर बच्चा अपने में अद्भुत,
कुछ न कुछ सबमें होता।
पर जब मन चाहा पढ़े लिखे वो,
शीघ्र अवश्य सफल होता।।
इच्छाओं का बोझ ना लादो,
उनके नाज़ुक कंधों पर।
बन जाए ना ये ही बेड़ी,
आपस के संबंधों पर।।
खरीद बेच कर पेपर जो ये,
अभी पास हो जाएँगे।
कोई भला ना होगा इनका,
जीवन में त्रास ही पाएँगे।।
कड़ा बने कानून देश में,
पेपर लीक न हो पाए।
लेकिन बेचने वालों के संग,
खरीददार भी सज़ा पाए।।
शिक्षा व्यवस्था में अब आगे,
आमूल चूल परिवर्तन हो।
जिसमें नैतिकता, संस्कार का,
पल प्रतिपल ही दर्शन हो।।
मात्र किताबी ज्ञान न पाएँ,
बच्चे अपनी शिक्षा में।
तन मन से मजबूत बनें वो,
सक्षम हों अपनी रक्षा में।।
करें सफलता संग स्वीकार,
असफलता को भी हँस कर।
रह ना जाएँ कहीं ठगे से,
किसी परिस्थिति में फँस कर।।
-कल्पना
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
38 मिनट पहले

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