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दुनिया के तमाम मंजर

                
                                                         
                            देखे हैं हमने भी यह दुनिया के तमाम मंजर,
                                                                 
                            
हर तर्कनाओ की यह सिफारिशे ,
हर मंजिल का यह सिलसिला,
हर दुआओं के मसलें,
हर मुसाफिर की खामोशी,
यूं ही गवाही दे जाती ये मंजर
देखे हैं हमने भी दुनिया के तमाम मंजर
हर हाथों की यह लकीरे,
हर मुसाफिर का वज़ूद
हर तर्कीस का तीर
देखे हे हमने भी दुनिया के तमाम मंज़र,
कहीं वज़ूद तो कहीं दर्द
कहीं अमीर तो कहीं फ़क़ीर
कहीं बादशाई तो कहीं गुलामी
कहीं दर्द की दवा तो कहीं ज़हर
देखे हे हमने भी यह दुनिया के तमाम मंज़र
कहीं मंजरो के फेसले
तो कहीं गर्माइशो के घाव
यह मंज़र तब्दील कंदस मंज़र
देखे हे हमने भी यह दुनिया के तमाम मंज़र
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