पत्थर से टकरा गया
शीशे का दिल लेकर
दर्द दस्तक देता रहा
ख्वाबों के दर पर
जिंदगी आज फिर
दिल्लगी कर गई।
-मं शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X