फूलों की कमी थी शायद
जीवन चमन ही था
सेहरा समझ के जीया जिसे
वो गुलशन ही था
मन में थी उलझन शायद
जीना सरल ही था
पहेली समझ उलझा जिसमें
तेरा खयाल ही था।
-मं शर्मा
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