ईश्वर ने,
रंग बिरंगी स्याहियों से,
धरती की कागज पर,
बहुत कुछ, सब-कुछ लिखा है,
हम,मन की आंखों से,
लिखावट का कुछ अंश पढ़ सकें, तो
हमारी जिंदगी की अनमोल
उपलब्धियां जुड़ जाएंगी,
नीली स्याही से,जलधि की
निस्तब्धता, शालिनता,
संपन्नता, प्रचंडता, गंभीरता,
लाली सुनहरी स्याही से
सुबह सूरज की, चंचलता,
कोमलता, निश्छलता,
निस्वार्थता, और प्रतिज्ञा,
हरी स्याही से
संपूर्ण धरती की हरितिमा में
सौंदर्याकर्षण, अद्भुत शैतल्य प्रवाह,
मन- अनुरंजन -प्रीत, जीव-जंतु -स्नेह,
वन-सिंधु का गौरव,
पंछियों, फूलों, तितलियों को
अलग-अलग रंगों की
स्याहियों से, लिखा,
आंसू में कलम डूबोकर
वेदना की अनुभूतियां लिखी,
नवरसों के मर्म को,
अपनी अलौकिक रंगों की
स्याहियों से, लिखा,
पृथ्वी के हर दिवस को
जिन्होंने,नयी नयी रंगों से लिखा,
स्रष्टा को और उनकी लेखनी
को नमन नमन नमन
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