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प्रेम वो एहसास है

                
                                                         
                            दूर होकर होता जो महसूस, अपने पास है
                                                                 
                            
धूप में भी छाँव का हो, प्रेम वो एहसास है

जिस्म दो हो, जिंदगी भर जान इक रहते है जो
ईश्वर ने ही बनाया, रिश्ता ये कुछ ख़ास है

मुतमइन होता नहीं दिल दीद से जिसकी कभी
बढ़ती जाती उम्र के ही साथ दिल की प्यास है

मन के मंदिर में, समाई रहती है मूरत सदा
ज़िंदगी इक दूजे बिन, उनको न आती रास है

रहते वाबस्ता हैं दिल के तार भी 'पारुल' सदा
पास हो कि दूर, रहता दिल में तो विश्वास है
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5 घंटे पहले

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