पथिक था एक राह पर,
निरंतर चलता गया,
रास्ते में न जाने क्यों
एक अवरोध आ खड़ा हुआ।
मैंने पूछा—क्यों रोका है
मेरी मंज़िल का सफ़र?
बोला—आसान नहीं होता
हर राह का पार उतर।
हिम्मत है तो लड़ आगे,
जीते तो बढ़ो आगे!
मैं लड़ता गया, आगे बढ़ता गया,
हर डर को पीछे छोड़ता गया।
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