बसे थे जो मेरे दिल में कभी करके बेकरार हमें फासला बढ़ा रहे भुला के वादे फलसफा जिंदगी का हमें बता रहे हैं
मना कर जश्न बर्बादी कहूं दर्द उनसे कैसे और वो रख कर दिल में ही सवाल हजार चिराग़ ए दिल मेरा बुझा रहे हैं
शायद किसी बहाने पलट के वापस सामने आ ना पाऊंगा कभी करके याद जमाना आपका दिल को समझा रहे हैं
समझा कर बेचैन दिल को करना इबादत होगी ये मजबूरी मेरी निभा के रस्म ए वफा शिद्दत से तुझे आजमा रहे हैं
मुझको आईना दिखाने वाले मत पूछो हाल ए गम मेरा सोच के अब हैसियत अपनी ही सामने तेरे सर झुका रहे हैं
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