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"प्यार "

                
                                                         
                            प्यार
                                                                 
                            
शोर था सुकून था
डर था सपना था
पछतावा था आशिर्वाद था
मेरे लिए तो तू सब था
जो मेरी दिल की पुकार थी
साया था रोशनी थी
माया थी प्रेम था
छुटा था पाया था
पर्दा था दावा था
बस एक एहसास था
दर्द था दवा थी
दुख था खुशी थी
शोक था उत्सव था
बस नजर का हेर फेर था।
-प्रियानी पटल्या
 
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