मैं खोजूंगी तुम्हें वहां तक
कहते हैं जहां खोजने से भगवान् मिल जाते ।
मैं लिखूंगी तुम्हें वहां तक
जहां तक कविताएं,ग़ज़ल और उपन्यास बन जाते ।
मैं गुनगुनाउंगी तुम्हें वहां तक
जहां पंक्तियां मधुर गान बन जाते ।
सहेजुंगी तुम्हारी यादों को वहां तक
जहां तक रवानियां भी राज़ बन जाते ।
करूंगी मैं सजदे इस कदर वहां तक
सुना है जहां तक लोगों के काम बन जाते ।
- प्रियंका रॉय
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