जब मै अपने जीवन गाथा का
उपसंहार लिखूँगी
तुम्हे अपने जीवन का
आधार लिखूँगी
जब मै अपने जीवन का
सोलह श्रृंगार लिखूँगी
तुम्हे अपने जीवन का
स्वर्ण अलंकार लिखूँगी
जब मै अपने जीवन का
मझधार लिखूँगी
तुम्हे अपने जीवन नइया का
पतवार लिखूँगी
जब मै अपने जीवन का
सार लिखूँगी
तुम्हे अपने लिए ईश्वर का
अनमोल उपहार लिखूँगी
- गीता 'श्रीवाणी'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X