उसकी एक हँसी से.....
अपना सारा दिन भर लेता हूँ!
सबके सामने मैं अनजान बन जाता हूँ!
और अकेले में उसी के नाम का दीया जलाता हूँ!
ये इश्क है मेरा, शोर नहीं करता!
बस दिल में रहता है, कहीं और नहीं जाता।
-अर्णव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X