हिज्र में विसाल मोहब्बत की जुदाई
प्रियतमा से मिलन की चाहत में
फर्जी दोषों के साथ
विरह की काल कोठरी का
हमें तो कौना मिला
हिज्र में विसाल मोहब्बत का
सिला यह मिला
अब तो मय कदे में गुजरती हैं
बची हुई जिंदगी
अब तो हमारे लेखन से उजड़े पड़े हैं
दशत कटाक्ष पे पन्ने
हमें तो लव से अरेंज मैरिज करने का
सिला यह मिला ।
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