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हर एक हार से फिर जीत निखर जाएगी

                
                                                         
                            हर एक हार से फिर जीत निखर जाएगी,
                                                                 
                            
ये रात जितनी भी गहरी हो, गुजर जाएगी।

जो आज थक के रुका है, वो संभल जाएगा,
ज़रा-सी धूप मिले तो राह सँवर जाएगी।

अंधेरों ने जो सिखाया है, वही काम आएगा,
इन्हीं सबक़ से आगे की डगर बन जाएगी।

जो गिर के उठने का हौसला रखता है दिल में,
उसी के हाथ में कल की ये लहर आएगी।

ये वक़्त ही तो है, ठहरेगा नहीं, जरूर बदलेगा,
जो आज मुश्किल है, कल को ये असर जाएगी।

जो सच पे डटा है, वो डर से परे रहता है,
झूठ की नींव तो इक दिन में बिखर जाएगी।

तू अपने हक़ की लड़ाई में लगा रह दिल से,
तेरी ये कोशिश ही मंज़िल में ढल जाएगी।

"नंदन" ये याद रख, मायूसियाँ टिकती नहीं,
तेरी उम्मीद ही हर ज़ख्म को भर जाएगी।
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एक घंटा पहले

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