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तुम्हारे मुस्कुराने से

                
                                                         
                            आजकल तुम्हारे मुस्कुराने से
                                                                 
                            

नहीं चहकते पक्षी
नहीं झूमते वृक्ष
उदासी घुमड़कर आती बहाने से

बादल जरूर बेपरवाह आते
मगर बरसते बरसते रुक जाते
हवाएँ बाज नही आती बहलाने से

नहीं बनता कोई इंद्रधनुष
वायुमंडल फिर भी व्याकुल
सफल नहीं होता दबाव बनाने से

मेरा मन खिलता
तुम्हें देखकर
हर वक्त अच्छे लगते 'उपदेश'
करीब बैठ कर मुस्कुराने से
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक दिन पहले

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