अब मुझे मोह नहीं रहा किसी से,
क्योंकि भरोसा हर बार हार गया,
भीड़ बहुत थी साथ देने वालों की,
ज़रूरत पड़ी तो हर चेहरा बेनक़ाब निकला।
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