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सफर का हाल किसी ने नहीं पूछा...

                
                                                         
                            सफर का हाल किसी ने नहीं पूछा,
                                                                 
                            
मंजिल की चाह सबको हैं!!
पांव के छाले किसी ने नहीं देखा,
मेरे थोड़े गुनाह याद सबको हैं!!

मैं उस वक्त जब टूटकर बिखरा था,
लोगों की नजर में एक नखरा था,
आज जोड़ा हैं किस तरह खुद को मैंने,
तब तो मैं सिर्फ एक बलि का बकरा था!!

मैं जब लुटा था किसी ने नहीं पूछा,
मेरे द्वारा बनी राह की चाह सबको हैं,
सफर का हाल किसी ने नहीं पूछा,
मंजिल की चाह सबको हैं!!

जीवन जब भी अवसाद हो जाता हैं,
बना - बनाया किस्सा बर्बाद हो जाता हैं,
मन के दलदल में ऐसे फंस गया था मैं,
फिर सीखा कैसे आबाद हुआ जाता हैं,

मुलजिम बनना कोई नहीं चाहता,
गवाह की चाह सबको हैं,
सफर का हाल किसी ने नहीं पूछा,
मंजिल की चाह सबको हैं||
-माही
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एक घंटा पहले

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