अगर शिक्षा एक पूजा है तो ,
हर शिक्षक एक पुजारी।
अगर शिक्षा एक तपस्या है
तो हर शिक्षक एक तपस्वी।
इस अमूल्य धन जिसका ना कोई मूल,
जीवन में लाती शिक्षा सफलता के फूल!
इस धन को देने वाले वो सभी धनवान,
होते मूल स्वरूप भगवान।
खुद जलकर जलाते जो ज्ञान की चिंगारी,
अज्ञानियों में लाते ज्ञान की फुंकारी!
जिनके पास होता है अनंत ज्ञान का भंडार,
जिनके ज्ञान से होता अज्ञान का संघार!
चाहे हों "शिक्षक" या हो मां,
दोनो से ही है हमारा जहां।
है ना फर्क ज्यादा दोनो में,
मिलता हमें ज्ञान बस पल भर की तलाश में।
जहां एक सिखाती मातृभाषा,
तो एक सिखाती जीवन जीने की भाषा!
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