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शिव खंडित को मंडित कर सकते हैं, टूटे हुए को जोड़ देते हैं...

शिव खंडित को मंडित कर सकते हैं, टूटे हुए को जोड़ देते हैं...
                
                                                         
                            मेरे लिए शिव संबल का नाम है। गहन अंधकार में प्रदीप्त अंतर्ज्योति। दुखों के दरिया में गले तक धंसे कृषक की देह को दूर मुंडेर पर रखे दीपक का सहारा हैं शिव। शिव को देखता हूँ तो सहन करने, वहन करने की शक्ति मिलती है। जीवन के पोर पोर में व्याप्त विष को पीने का सामर्थ्य जागता है। निष्काषित, परित्यक्त, लांछित, दमितों के प्रति सहोदर भाव उदित होता है। 
                                                                 
                            

इस संसार की व्यर्थता के बीच कैसे वैराग्य की भूमि पर भी परिवार बसाया जा सकता है, शिव बताते हैं। शिव प्रेम के नाम पर अतिक्रमण नहीं करते। पति होने के अधिकार को आरोपित नहीं करते, प्रेमी की तरह साथ खड़े रहते हैं। उन्हें वियोग में बेसुध होना और प्रेम में खो जाना आता है। वह देवताओं और दानवों में भेद नहीं करते।  आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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