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आज का शब्द: श्री और सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता 'उक्ति'

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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - श्री जिसका अर्थ है 1. लक्ष्मी 2. आदर सूचक शब्द 3. कीर्ति 4. चमक 5. शरद ऋतु का एक राग। कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

कुछ न हुआ, न हो।
मुझे विश्व का सुख, श्री, यदि केवल
पास तुम रहो !

मेरे नभ के बादल यदि न कटे—
चंद्र रह गया ढका,
तिमिर रात को तिरकर यदि न अटे

लेश गगन-भास का,
रहेंगे अधर हँसते, पथ पर, तुम
हाथ यदि गहो।

बहु-रस साहित्य विपुल यदि न पढ़ा—
मंद सबों ने कहा—
मेरा काव्यानुमान यदि न बढ़ा—

ज्ञान जहाँ का रहा,
रहे, समझ है मुझमें पूरी, तुम
कथा यदि कहो। 

10 घंटे पहले

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