प्रेम जैसी निर्मम वस्तु क्या भय से बाँध कर रखी जा सकती है? वह तो पूरा विश्वास चाहती है, पूरी स्वाधीनता चाहती है, पूरी ज़िम्मेदारी चाहती है।
- प्रेमचंद
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।'
कमेंट
कमेंट X