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दून पुस्तक महोत्सव में 26 नई पुस्तकों के विमोचन के साथ गढ़वाली और कुमाऊँनी साहित्य की धूम

हलचल
                
                                                         
                            देहरादून में चल रहे 'दून पुस्तक महोत्सव 2026' के केंद्र में, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (एनबीटी) ने एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल की शुरुआत की है—जिसके तहत गढ़वाली और कुमाऊँनी, दोनों भाषाओं में 13-13 पुस्तकों का विमोचन किया गया; यह उत्तराखंड की समृद्ध भाषाई विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
                                                                 
                            

ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित यह महोत्सव धीरे-धीरे देहरादून को एक जीवंत साहित्यिक केंद्र में बदल रहा है; यहाँ पूरे भारत से आए प्रकाशकों के 300 से अधिक पुस्तक स्टॉल हैं, साथ ही विभिन्न प्रकार के सत्र और बच्चों के लिए प्रतिदिन सीखने की गतिविधियाँ भी आयोजित की जाती हैं। फिर भी, 'दून पुस्तक महोत्सव' के इस विशाल स्वरूप और भव्यता के बीच, क्षेत्रीय भाषाओं पर दिया गया यह विशेष ध्यान ही इसकी सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता के रूप में उभरकर सामने आता है।

पहाड़ों से आई कहानियाँ

गढ़वाली और कुमाऊँनी भाषाओं की 26 पुस्तकें 4 अप्रैल को महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा विमोचित की गईं। ये पुस्तकें एनबीटी द्वारा शुरू किए गए एक समर्पित प्रयास का परिणाम हैं, जिसने पूरे उत्तराखंड से लेखकों, अनुवादकों और भाषा विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्रित किया। पिछले वर्ष आयोजित एक विशेष कार्यशाला की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, इस परियोजना के अंतर्गत बाल साहित्य और अन्य महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों का चयन और उनका गढ़वाली तथा कुमाऊँनी भाषाओं में अनुवाद किया गया। ये दोनों भाषाएँ राज्य के सांस्कृतिक ताने-बाने का एक अभिन्न अंग हैं, किंतु मुख्यधारा के प्रकाशन जगत में इन्हें प्रायः यथोचित स्थान प्राप्त नहीं होता। यह पहल न केवल मातृभाषाओं में गुणवत्तापूर्ण पठन-सामग्री की उपलब्धता को सुगम बनाती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि युवा पीढ़ी अपनी भाषाई जड़ों से जुड़ी रहे।

लोकार्पित गढ़वाली पुस्तकों में चौरी-चौरा जन क्रांति को नायो सबेरो, नन्ना हैरा चखुला, उम्मीदाई किरण, गैरा सगरा अजूबा, और आदमी अर छैल अर हौरी कहानी आदि शामिल हैं। कुमाऊंनी पुस्तकों में माटी म्यार देशे की, अभिमानै हार, बधानै जानी कान, खाटू श्यामक अनसुनी कहानी, और गुलाब का दगड़ू समेत अन्य पुस्तकें शामिल हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को ध्यान में रखते हुए, उत्तराखंड के लेखकों और अनुवादकों की सहायता से तैयार की गई ये पुस्तकें बहुभाषी शिक्षा तथा मातृभाषा के माध्यम से सीखने के प्रति एनबीटी की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

संवादों में विचार

पुस्तकों के विमोचन के साथ-साथ 'दून साहित्य महोत्सव' भी चल रहा है, जो 5 अप्रैल से शुरू हुआ और बातचीत व विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक जीवंत मंच बनकर उभरा है। इस साहित्योत्सव में अलग-अलग क्षेत्रों की कई जानी-मानी हस्तियाँ शामिल हो रही हैं, जिनमें नितिन सेठ, कुलप्रीत यादव, अखिलेंद्र मिश्र, आचार्य प्रशांत, शुभांशु शुक्ला और सतीश दुआ जैसे नाम प्रमुख हैं। इनके सत्रों में विषयों की एक विस्तृत शृंखला पर चर्चा की जा रही है जिसमें सिनेमा और समकालीन साहित्य से लेकर नेतृत्व और वर्दीधारी साहस तक; भारत के अतीत के देशभक्ति और क्रांतिकारी आंदोलनों से लेकर इंसान और मशीन के बीच बदलते रिश्तों पर होने वाली चर्चा तक शामिल हैं। आगे पढ़ें

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3 सप्ताह पहले

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