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Social Media Poetry: ठेके पर ली है सच्चाई? काहे भाई ?

वायरल काव्य
                
                                                         
                            हर  मौके  पर तुम्हीं सही हो
                                                                 
                            
ठेके   पर  ली  है   सच्चाई?
काहे भाई ?

कल भी हमको ग़लत बताया
और  आज  भी हमीं ग़लत हैं
हम जो कुछ कहते,सब झूठा
केवल  सही   तुम्हारे   मत हैं

खुद को सही सिद्ध करने को
कितनी चीख पुकार मचायी !
काहे भाई ?

बरसों  तक   सुविधाएं  गायीं 
मंगलकारी      ढोल    बजाए 
और  हमारी  झोली तक बस 
संवेदना   -    सँदेशे      आए 

गला   हमारा   कसा   गया है 
जब   हमने आवाज   लगायी
काहे भाई ?  आगे पढ़ें

एक वर्ष पहले

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