हर मौके पर तुम्हीं सही हो
ठेके पर ली है सच्चाई?
काहे भाई ?
कल भी हमको ग़लत बताया
और आज भी हमीं ग़लत हैं
हम जो कुछ कहते,सब झूठा
केवल सही तुम्हारे मत हैं
खुद को सही सिद्ध करने को
कितनी चीख पुकार मचायी !
काहे भाई ?
बरसों तक सुविधाएं गायीं
मंगलकारी ढोल बजाए
और हमारी झोली तक बस
संवेदना - सँदेशे आए
गला हमारा कसा गया है
जब हमने आवाज लगायी
काहे भाई ?
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X