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काका हाथरसी की हास्य कविता : अमंगल आचरण, कर देगी लोटपोट

काका हाथरसी
                
                                                         
                            मात शारदे नतमस्तक हो, काका कवि करता यह प्रेयर
                                                                 
                            
ऐसी भीषण चले चकल्लस, भागें श्रोता टूटें चेयर

वाक् युद्ध के साथ-साथ हो, गुत्थमगुत्था हातापाई
फूट जायें दो चार खोपड़ी, टूट जायें दस बीस कलाई
 

आज शनिश्चर का शासन है, मंगल चरण नहीं धर सकता
तो फिर तुम्हीं बताओ कैसे, मैं मंगलाचरण कर सकता

इस कलियुग के लिये एक आचार संहिता नई बना दो
कुछ सुझाव लाया हूँ देवी, इनपर अपनी मुहर लगा दो
 
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एक वर्ष पहले

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