आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Hasya Vyangya: रऊफ़ रहीम की ग़ज़ल- जीने का कुछ उसूल न मरने का ढंग है

हास्य
                
                                                         
                            जीने का कुछ उसूल न मरने का ढंग है 
                                                                 
                            
हर छोटी-छोटी बात पे आपस में जंग है 

जब से सुना है फ़िल्म दी डे आफ़्टर का हाल 
खम्बों से हम ने बाँध के रखा पलंग है 

टी वी पे गाय भैंस पुकारेंगे रोज़ ही 
उर्दू ज़बाँ से इस में ज़ियादा तरंग है 

आया है कैसा दौर सियासत में दोस्तो 
राई भी ख़ुश नहीं है रेआया भी तंग है 

आप अपने हाथ उजाड़ न लें ये जुनूँ-परस्त 
शीशे के घर में रहते हुए मश्क़-ए-संग है 

हूरों पे है निगाह गो मरक़द में पाँव हैं 
वाइ'ज़ अख़ीर-ए-उम्र में क्या तेरा ढंग है  आगे पढ़ें

6 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर