आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुद्दत के बा'द इस ने लिखा मेरे नाम ख़त - आग़ा अकबराबादी

Agha akbarabadi ghazal muddat ke baad isne likha mere naam khat
                
                                                         
                            

मुद्दत के बा'द इस ने लिखा मेरे नाम ख़त
मेरी शिकायतों से भरा है तमाम ख़त

घबरा न इस क़दर दिल-ए-बेताब सब्र कर
आता है कोई रोज़ में अब सुब्ह-ओ-शाम ख़त

लिक्खा हुआ है ख़ास तुम्हारे ही हाथ का
पहचानता है ख़ूब तुम्हारा ग़ुलाम ख़त

तहरीर उन की सीना पे रख दीजियो मिरे
बदले जवाब-ए-नामा के आएगा काम ख़त

लिक्खा है अब न लिक्खेंगे हम कोई ख़त तुझे
ख़त आया मेरी मौत का लाया पयाम ख़त

ज़ाए' न जाएगी तिरी मेहनत किसी तरह
क़ासिद अजूरा देता हूं चुटकी में थाम ख़त

आशिक़-नवाज़ियाँ हैं तबीअत में यार की
लिक्खा है हर महीने में भेजो मुदाम ख़त

तहरीर कर के सैकड़ों वा'दे मुकर गए
दिखलाऊँगा हुज़ूर को रोज़-ए-क़याम ख़त

ख़त लिख के आज डाक पे पहुँचेंगे यार को
पहुँचाएगा हमारा पयाम-ओ-सलाम ख़त

'आग़ा' निसार होजिए इनआ'म दीजिए
लाया है उन का क़ासिद-ए-सरसर-ख़िराम ख़त

6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर