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होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो !

होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो !
                
                                                         
                            यह मिट्टी की चतुराई है,
                                                                 
                            
रूप अलग औ’ रंग अलग,
भाव, विचार, तरंग अलग हैं,
ढाल अलग है ढंग अलग,

आजादी है जिसको चाहो आज उसे वर लो
होली है तो आज अपरिचित से परिचय कर को !

निकट हुए तो बनो निकटतर
और निकटतम भी जाओ,
रूढ़ि-रीति के और नीति के
शासन से मत घबराओ,

आज नहीं बरजेगा कोई, मनचाही कर लो
होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो !
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6 वर्ष पहले

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