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कुँवर नारायण: उसे ख़ाली हाथ लौटाने से पहले

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क्यों उसे लौटकर आना पड़ता है
बार-बार उसी दुनिया में
लिए वही ख़ाली पात्र?

क्यों उसे लौट जाना पड़ता है।
हर बार उसी तरह ख़ाली हाथ?
मुट्ठी भर अन्न डालते हुए
उसके कटोरे में देखें।
हमारा दिया
उसकी विनय से छोटा तो नहीं।

मिट्टी के ख़ाली पात्र को नहीं
करुणा से भरी उसकी आँखों को देखें
कि हमारे द्वार पर आया भिक्षुक
कहीं बुद्ध तो नहीं? 

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4 घंटे पहले

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