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भवानी प्रसाद मिश्र की कविताएं परिवर्तन और सुधार की अभिव्यक्ति हैं

साहित्य
                
                                                         
                            भवानी प्रसाद मिश्र हिंदी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। ये आम लोगों से उनका जुड़ाव था कि प्यार से लोग उन्हें भवानी भाई कहकर सम्बोधित किया करते थे। भवानी प्रसाद मिश्र उन गिने चुने कवियों में थे जो कविता को ही अपना धर्म मानते थे और आम जनों की बात उनकी भाषा में ही रखते थे। उन्होंने कवियों को नसीहत भी दी,
                                                                 
                            

जिस तरह हम बोलते हैं उस तरह तू लिख, और इसके बाद भी हम से बड़ा तू दिख।

अज्ञेय ने दूसरे तार-सप्तक में उनकी कविता को प्रकाशित किया। उनका प्रथम संग्रह 'गीत-फ़रोश' अपनी नई शैली, नई उद्भावनाओं और नये पाठ-प्रवाह के कारण काफ़ी लोकप्रिय हुआ।

भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म 29 मार्च 1914 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद ज़िले में टिगरिया गांव में हुआ था। उन्होंने संस्कृत, हिंदी और अंग्रेज़ी विषय से बीए की शिक्षा पूरी की। महात्मा गांधी के विचारों के अनुसार शिक्षा देने के विचार से एक स्कूल खोलकर अध्यापन कार्य शुरू किया और उस स्कूल को चलाते हुए 1942 में गिरफ्तार होकर 1945 में छूटे। इसके बाद अगले पांच साल उन्होंने वर्धा के महिलाश्रम में शिक्षा देते हुए बिताया। 
 
उनकी कविताओं में नये भारत का स्वप्न झलकता है। उनकी कविताएं परिवर्तन और सुधार की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने ख़ुद को कभी निराशा के गर्त में डूबने नहीं दिया। आज़ादी के आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया तो बाद में तानाशाही के ख़िलाफ़ भी आवाज़ बुलंद की। 
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3 घंटे पहले

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