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गले मुझ को लगा लो ऐ मिरे दिलदार होली में

होली
                
                                                         
                            गले मुझ को लगा लो ऐ मिरे दिलदार होली में
                                                                 
                            
बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में

नहीं ये है गुलाल-ए-सुर्ख़ उड़ता हर जगह प्यारे
ये आशिक़ की है उमड़ी आह-ए-आतिश-बार होली में

गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ को भी जमाने दो
मनाने दो मुझे भी जान-ए-मन त्यौहार होली में

'रसा' गर जाम-ए-मय ग़ैरों को देते हो तो मुझ को भी
नशीली आँख दिखला कर करो सरशार होली में

- भारतेन्दु हरिश्चंद्र

बार बार होली - लुत्फ़ुन्निसा इम्तियाज़

दिखलाएं किस मज़े से अब के बहार होली
खेले हैं सब जम्अ' हो क्या गुल-एज़ार होली

सारी परी-रुख़ां मिल कैसी मचाएं धूमें
रंग ज़र्द सुर्ख़ ले कर खेलें निगार होली

सोने की थालियों में रख कर अबीर-ओ-अब्रक
भर मुठ्ठियाों में फेंके कर के पुकार होली

शीशों में ज़ाफ़रां का रंग-ए-शबाब भर कर
ऊपर से क़हक़हों के है बार बार होली

- लुत्फ़ुन्निसा इम्तियाज़
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बार बार होली - लुत्फ़ुन्निसा इम्तियाज़

4 वर्ष पहले

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