आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ख़्य्याम में संगीत था या रूह की खूश्बू

ख़य्याम
                
                                                         
                            जाने माने संगीतकार ख़य्याम ने हिंदी फिल्मी दुनिया में कभी-कभी, बाज़ार, उमराव जान, रज़िया सुल्तान,  नूरी, त्रिशूल, आहिस्ता आहिस्ता, दिल-ए-नादान, रजिया सुल्तान, हीर रांझा जैसी फिल्मों में अपनी बेजोड़ संगीत कला से अन्य संगीतकारों के लिए रूह और रूबाइयत का नया रास्ता तैयार किया। ख़्य्याम के संगीत में एक पाक रूह की खूश्बू है। रोमानियत एक अजीब सी महक लिए हुए है। 
                                                                 
                            

  आगे पढ़ें

अपनी किस्मत आजमाने के लिए बम्बई चले गए... 

एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर