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स्वतंत्रता के शब्द

                
                                                         
                            भारत एक देश नहीं ,सीधा सच्चा वेश है
                                                                 
                            
यह एक देश नहीं,यह बहुत विशेष है
मुकुट इसका कश्मीर,कन्याकुमारी चरण इसके
जातियों में बटा है,फिर भी बहुत अटा है
सटी है गलियां इसकी,चौड़े हैं मैदान इसके
मुकुट है हिम पर,चरण है हिंद पर
आतंक को घटाता ,सबको साथ है लाता
विदेशी आए ,घने बादल है छाए
बादलों के बीच बिजली है कड़की, गोरो की हिल गई खिड़की
गोरे आए कालो के घर,कालो को ना माने नर
हवा चली है सर सर
खुद को समझे विशेष,बाकी सब थे अधिशेष
आजादी खातिर सुभाष ने जोर दिया,अंग्रेजों को अंदर से झकझोर दिया
नाहर ने खून की नहरें बहा दी,जयचंदो ने गोरो को पहना दी
आजाद ने आजादी की छड़ी है लड़ाई
मन भगत का भक्ति में हुआ लीन,दुर्गा भाभी का सुख लिया है छीन
गोरो को सब कुछ बता दिया,उन्होंने हमें सता दिया
खुद ही ने सतरह बरस में चेम्स पर फोड़ा,उसपर लग गया हथोड़ा
सावरकर गया जेल ,नहीं मिला उसको बेल
गोरो ने रच दिया खेल,सुख से राज की मांग करने वाले भगत को भेज दिया जेल
साइमन गो बैक के लगे नारे,लड़खड़ाए गोरे सारे
पंजाब केसरी को गोरो ने केसरिया में लिपटा दिया,हमने लगभग अंग्रेजों को निपटा दिया
द्वितीय विश्व युद्ध हुआ समाप्त,गोरे बोले यह तुम्हारा अभिशाप
पर अब हम ना रुके,हम ना झुके
उन्हें के खदेडकर ली है हमने सांस , सोन पक्षी फिर से हमारे पास
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एक घंटा पहले

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