करूं कर्म पावन
बोलूं मन लुभावन
करूं भजन तेरा
यह वतन तेरा
यह गगन तेरा
यह तन तेरा
यह मन तेरा
भक्ति मेरी करो स्वीकार
ओ प्रभु! तेरी महिमा अपार
मैं बांसुरी तेरी ,छेड़ो तान
ओ मेरे भगवान!
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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