जानवरों को
पक्षियों को
कैद करके रख रहे हैं हम
अपने मजे से रह रहे हैं हम
पिंजरों को खोल दूं
पिंजरों को तोड़ दूं
चाह रहा है मेरा मन
दूं आजादी और अमन
चाह रहा है मेरा मन।
- सहज कुमार
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