पेपर लीक से लिप रहा युवाओ का फ्यूचर
टूट रहा उम्मीद,बिखर रहा भविष्य ।
लोकतंत्र का ये हाल हुआ
युवा दर-दर भटकने को मजबूर।
तंगी में वो घिरा हुआ,
मेहनत का फल उसको खट्टा मिला।
गलती बस इतनी थी
उसने अपना नेता फ्रीबिज वाला चुना।
राम के नाम पर राजनीति
बाकी कोई काम कहाँ?
रुपया गिर रहा,मुद्रास्फीति से आम आदमी घिर रहा।
सोने-चांदी की कीमतें आसमान छू रही,
पेट्रोल-डीजल और ईंधन गैस की कमी हर कहीं।
हाल बड़ा बेहाल हुआ,
लोकतंत्र में लोकतंत्र ही मोजताज/परेशान हुआ।
सरकारी संस्थाओं का दुरिपयोग,
सत्ताधारी करते हैं इस यंत्र का खूब प्रयोग।
ई.डी,सी.बी.आई के डर से
अच्छे-अच्छे को वॉशिंग मशीन में धोते है,
फिर भ्रष्ट से भ्रष्ट साफ सुथरा बन के निकलते हैं।
जो पहले दहाड़ते थे अब वो हिनहिनाते है,
आलोचक जब प्रशंशक बन जाए
ऐसे ही तब कारनामे होते हैं।
-अनुराधा कामेंद्र साहनी
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