एक रात उस अजनबी के साथ
मैंने बिताए जो पल,वो रहेगा जिंदगी भर याद।
वो मेरे जुल्फों के पनाहों में था,
मैं उसके बाहों में थी।
आंखों से कुछ कह गया,
वो मुझमें बह गया।
लगा पुरानी जान पहचान,
वो ऐसे मिला
मुझें लगा कोई अपना सा है।
बहुत अपना...
पर सच मे अब लगता है वो था बस सपना।
एक रात उस अजनबी के साथ
उसने मुझसे उम्मीदें नही की,
मैंने भी उसे नही बांधा।
बस प्रेम थी नजरों में,
जबाब जरूर ना लगा।
जाना था उसको ये जानते हुए,
मैंने उसे अपना माना।
उसका आलिंगन जैसे सदियों का था अपना कुछ
हम दोनों के दरम्यान कुछ तो था अलग।
ना सवाल ना जबाब,
बस देख के ही मन को मिला सुंकूँ।
उसका अलविदा कहना,
जैसे मेरे जीवन मे खुशियों का आना हो।
एक रात उस अजनबी के साथ।
मैंने बिताए जो पल,वो रहेगा जिंदगी भर याद।
-अनुराधा कामेंद्र साहनी
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