आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एक रात उस अजनबी के साथ

                
                                                         
                            एक रात उस अजनबी के साथ
                                                                 
                            
मैंने बिताए जो पल,वो रहेगा जिंदगी भर याद।
वो मेरे जुल्फों के पनाहों में था,
मैं उसके बाहों में थी।
आंखों से कुछ कह गया,
वो मुझमें बह गया।
लगा पुरानी जान पहचान,
वो ऐसे मिला
मुझें लगा कोई अपना सा है।
बहुत अपना...
पर सच मे अब लगता है वो था बस सपना।
एक रात उस अजनबी के साथ
उसने मुझसे उम्मीदें नही की,
मैंने भी उसे नही बांधा।
बस प्रेम थी नजरों में,
जबाब जरूर ना लगा।
जाना था उसको ये जानते हुए,
मैंने उसे अपना माना।
उसका आलिंगन जैसे सदियों का था अपना कुछ
हम दोनों के दरम्यान कुछ तो था अलग।
ना सवाल ना जबाब,
बस देख के ही मन को मिला सुंकूँ।
उसका अलविदा कहना,
जैसे मेरे जीवन मे खुशियों का आना हो।
एक रात उस अजनबी के साथ।
मैंने बिताए जो पल,वो रहेगा जिंदगी भर याद।
-अनुराधा कामेंद्र साहनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर