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मुझे कोई झूठी दिलासा ना दिलाए तो अच्छा है

                
                                                         
                            दिल के अरमां दिल में ही रह जाए तो अच्छा है,
                                                                 
                            
मुझे कोई झूठी दिलासा ना दिलाए तो अच्छा है।

तन्हाईयों से कर ली है अब मैने मुकम्मल दोस्ती ,
अब मेरे करीब कोई न आए तो अच्छा है ।

टूट कर बिखर चुके है जो ख्वाब रातों में ,
उन्हें कोई आँखों में न सजाये तो अच्छा है ।

एक अकेला दिया कब तक लड़ता रहेगा तूफानों से ,
किसी हवा के झोंके से बुझ जाए तो अच्छा है।
-बसंत पंवार प्रजय 
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28 मिनट पहले

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