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जब पुलिस कमिश्नर ने ख़ुमार से कहा- वाह साहब वाह, बहकें आप और दिमाग़ का इलाज मैं कराऊं !

साहित्य
                
                                                         
                            उर्दू के मक़बूल शायरों में एक नाम ख़ुमार बाराबंकवी का भी है जिन्हें सुनने के लिए श्रोता दूर-दूर से आया करते थे। लोग उनके बड़े प्रशंसक थे और अपने इस पसंदीदा शायर को बड़े गौर से सुना करते थे। लेकिन एक बार की बात है कि मुशायरे के लिए गए ख़ुमार के साथ कुछ ऐसा हुआ कि बात गाली-गलौज से लेकर हाथापाई तक आ गई। यह संस्मरण वाणी प्रकाशन से प्रकाशित किताब 'चेहरे' में निदा फ़ाज़ली ने लिखा है।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
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निदा लिखते हैं कि...

21 घंटे पहले

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