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दाग़ देहलवी: इस लिए रूठ रहे हैं कि मनाए कोई

dagh dehlvi famous ghazal ye jo hai hukm mere paas na aaye koi
                
                                                         
                            


ये जो है हुक्म मिरे पास न आए कोई
इस लिए रूठ रहे हैं कि मनाए कोई

ताक में है निगह-ए-शौक़ ख़ुदा ख़ैर करे
सामने से मिरे बचता हुआ जाए कोई

वादा-ए-वस्ल उसे जान के ख़ुश हो जाऊँ
वक़्त-ए-रुख़्सत भी अगर हाथ मिलाए कोई

सर्द-मेहरी से ज़माने की हुआ है दिल सर्द
रख कर इस चीज़ को क्या आग लगाए कोई

आप ने 'दाग़' को मुँह भी न लगाया अफ़्सोस
उस को रखता था कलेजे से लगाए कोई
 

एक दिन पहले

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