"प्रकृति और अनंत आकाश के बीच,
एक अदृश्य सेतु की तरह
बहती रहती है जीवन की लय।
निरंतर गतिमय नृत्य और
स्थिर चित्रों की निःशब्दता के बीच
कहीं जन्म लेती है मानवता।
वहाँ—
जहाँ श्वास और निश्वास
मंद तरंगों की भाँति उठते-गिरते हैं।
उन्हीं सूक्ष्म लहरों में
मनुष्य का समूचा संसार बसता है—
भावनाओं का ज्वार,
विचारों का अनंत प्रवाह।
आगमन और प्रस्थान की
अनगिन यात्राएँ
हर धड़कन के साथ लिखी जाती हैं।
और इस प्रकार
श्वासों की वह क्षणभंगुर डोरी
मानव जीवन की दिशा निर्धारित करती रहती है।"
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