गर्मी का मौसम और मौसम की गर्माई,
इसमें हमें फिर नींबू शिकंजी याद आई।
पौदीने के पत्तों ने तन मन में उर्जा जगाई,
खट्टी-मीठी शिकंजी फिर सबके मन भाई।।
चाय का मौसम हुआ पुराना होता दिल अब बेगाना,
सर्दी भागी तो चाय को कह दी अब बाय- बाय।
स्वदेशी खान-पान की अब आदत डाली,
कोल्डड्रिंक छोड़ अब नींबू पानी अपनाया ।।
रोगों को शरीर से यदि घर से दूर भगाना है,
कोल्डड्रिंक जैसे ज़हर को अब दूर भगाना है।
दादी-नानी के घरेलू नुस्खे अब अजमाना है,
शरीर को स्वस्थ और सुंदर फिर बनाना है।।
जो भी मेहमान घर पर यदि कोई आये,
उसको नींबू पानी पौदीने की शिकंजी पिलाएं।
कम पैसों में सबसे सुंदर आवभगत का तरीका,
बस समझ लो अब मितव्ययता का यह सलीका।।
गर्मी आलस्य लू कभी तुम्हारे पास न आयेंगे,
तुम्हें देखते ही डरकर फिर रोग भाग जायेंगे।
चुस्ती फुर्ती से फिर मन प्रफुल्लित रहेगा,
जीवन का हर सपना आसानी से पूरा होगा।।
पूर्णतः मौलिक स्वरचित अप्रकाशित
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
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