आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पद प्रतिष्ठा मान सम्मान

                
                                                         
                            पद प्रतिष्ठा मान सम्मान
                                                                 
                            
सबको नहीं मिलती एक समान
मेहनत से मिलती यह सब सारी
कृपा भी हो ईश्वर की ढेरों सारी
पर कुछ लोग करते है इसका
घमंड भरा अभिमान

दुनिया उनको लगती छोटी सारी
पर पता नहीं क्या उनको ?
सब कुछ रह जाएगा एकदिन यही धरा
ये पद प्रतिष्ठा और मान सम्मान,
केवल रह जाएगा नाम धारा

ना कर तू ओ बंदे इतना घमंड
पद प्रनतष्ठा और झूठे मान सम्मान का
पद प्रतिष्ठा में रहकर कुछ अच्छे काम करो
मान सम्मान को अपने नाम करो

सबको नहीं मिलता पद ऊँचा
मिला है तो बिन किए कुछ
उसपर ना इतना
अभिमान करो,
दीन दुखियों का सेवक बनके
उनके लिए कुछ अच्छा काम करो

ईश्वर की है मर्जी सारी
कोई राजा है तो कोई भिखारि
पूरक एक दूजे के सब
गरीबी नहीं कोई कलंक है
मध में होकर अंधे
पद का क्यों क्यूँ करते हो अभिमान
क्यूँ पीते हो घूंट फिर अभिमान का।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर