मैने भेज दिया था संदेश की तुम आओगे,
धूल भरी आंधियों में कही तुम दिख जाओगे।
मैने जो देखा मुखड़ा वो तुम्हारा दर्पण नहीं था,
तुम आखिर किसके चेहरे में मुझे पाओगे।
चली बहुत यहां फिजाओं में बाते,
पर जो मुझे समझ सके ऐसी बाते तुम कहा से लाओगे।
मत डाला करो इस तरह से मेरे ऊपर हर कुछ,
अगर में ढक गया, तो इसे तुम कैसे हटाओगे।
आज बन भर चुका है हर गलियारा बेअदबी से,
पर मेरे कदमों के निशानों को कैसे तुम हटाओगे।
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