करिए बगावत ये करम नहीं है बुरा, पर खुद के विवेक से विचार कीजिए।
कहीं किसी षड्यंत्र के शिकार तो नहीं हो, देखभाल कर के स्वीकार आप लीजिए।
लोग यहाँ ढूँढ़ते हैं दूसरों के कंधों को ही, यदि ऐसा नहीं है सहर्ष पग दीजिए।
राजनीति बहुत ही गंदा खेल जान लीजै, इसको मलाई चाय मान मत पीजिए।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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