पात पात शूल लिए तन पीत फूल लिए, देखिए प्रकृति यह रूप ही निराला है।
हरित शरीर पर काँटे हैं नुकीले अति, उनके भी बीच देखो जीवन को पाला है।
संकटों के बीच में ही जीवन निखरता है, फिर जिसे देख जग होता मतवाला है।
यही है प्रकृति इस जग की निराली देखो, करमों का फल बन मिलता निवाला है।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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