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कविता -"सुहाना सफ़र"

                
                                                         
                            शाम बेकरार हो, हाइवे की रफ़्तार हो।
                                                                 
                            
बाइक पे सवार हो, गाड़ी सत्तर पार हो।

शाम कुछ सुहानी हो,
साथ में फिर रानी हो।
अपनी कहानी हो,,,
खुद की जुबानी हो।
सभी सुकुमार हो, पूरा परिवार हो।
बाइक पे सवार हो........

मन में उमंग हो,
दिल में तरंग हो।
नभ में विहंग हो,
सभी संग संग हो।
शाम शानदार हो, दिन शनिवार हो।
बाइक पे सवार हो..........

महीना सावन हो,
मन भी पावन हो।
ऋतु मनभावन हो,
टाइम सात बावन हो।।
मौसम में खुमार हो, रिमझिम की फुहार हो।
बाइक पे सवार हो............

लोग तीन चार हो,
म्यूजिक की झंकार हो।
रोड का विस्तार हो,
जवा का बाजार हो।
कार सी रफ्तार हो, कंपटीशन में कार हो।
बाइक पे सवार हो..........

सामने हवलदार हो,
बोले खबरदार हो।
चालान को तैयार हो,,,
भले बाप की सरकार हो।
जब ऐसा पहरेदार हो, तो देश का उद्धार हो।
बाइक पे सवार हो..........

सपना साकार हो,
मंजिल की दरकार हो।
आप सब का प्यार हो,
जयशंकर सा किरदार हो।
खड़ा बरखुदार हो, बोले नमस्कार हो।
बाइक पे सवार हो.........


 
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28 मिनट पहले

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